Chapter 16 पतझर में टूटी पत्तियाँ Class 10 Hindi Sparsh NCERT Summary

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Chapter 16 Class 10 Hindi Sparsh NCERT Notes are easy to follow and understand, they provide in-depth coverage of all topics, and they contain plenty of practice problems. This can help them feel more confident going into their exams, and ultimately help them succeed.

Chapter 16 पतझर में टूटी पत्तियाँ Class 10 Hindi Sparsh NCERT Notes

इस पाठ में दो प्रसंग सम्मिलित हैं। पहला प्रसंग ‘गिन्नी का सोना’ जीवन में अपने लिए सुख-साधन जुटाने वालों से नहीं बल्कि उन लोगों से परिचय कराता है जो इस जगत् को जीने और रहने योग्य बनाए हुए हैं। दूसरा प्रसंग ‘झेन की देन’ बौद्ध दर्शन में दी गई ध्यान की पद्धति की याद दिलाता है जिसके कारण जापान के लोग आज भी अपनी व्यस्ततम दिनचर्या के बीच कुछ चैन भरे पल बिता लेते हैं।

लेखक परिचय

रविन्द्र केलेकर का जन्म 7 मार्च 1925 को कोंकण क्षेत्र में हुआ था। ये छात्र जीवन से ही गोवा मुक्ति आंदोलन में शामिल हो गए। गांधीवादी चिंतक के रूप में विख्यात केलेकर ने अपने लेखन में जन-जीवन के विविध पक्षों, मान्यताओं और व्यकितगत विचारों को देश और समाज परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत किया है। इनकी अनुभवजन्य टिप्पणियों में अपनी चिंतन की मौलिकता के साथ ही मानवीय सत्य तक पहुँचने की सहज चेष्टा रहती है।

गिन्नी का सोना Class 10 Sparsh Hindi Explanation Summary

शुद्ध सोने और गिन्नी के सोने में अंतर होता है। गिन्नी के सोने में ताँबे की मिलावट होती है । इसलिए उसमें चमक और मजबूती अधिक होती है। स्त्रियाँ इसी से गहने बनवाती हैं। शुद्ध आदर्श भी शुद्ध सोने जैसे होते हैं। कुछ लोग उनमें व्यावहारिकता का ताँबा मिलाकर चला देते हैं। ऐसे लोगों को ‘प्रैक्टिकल आइडियालिस्ट’ कहते हैं । परंतु जब चर्चा व्यवहार की होने लगती है तो आदर्श पीछे रह जाता है।

कुछ लोग कहते हैं कि गांधीजी प्रैक्टिकल आइडियालिस्ट थे। वे व्यावहारिकता को पहचानते थे। इसीलिए वे अपने विलक्षण आदर्श चला सके। गांधी जी कभी भी आदर्शों को व्यावहारिकता के स्तर पर उतरने नहीं देते थे। बल्कि व्यावहारिकता को आदर्शों के स्तर पर चढ़ाते थे । वे सोने में ताँबा नहीं बल्कि ताँबा में सोना मिलाकर उसकी कीमत बढ़ाते थे । इसीलिए सोना हमेशा आगे आता रहा।

व्यवहारवादी लोग हमेशा सजग रहते हैं। लाभ-हानि का हिसाब लगाकर ही कदम उठाते हैं। वे जीवन में सफल होते हैं तथा अन्यों से आगे जाते हैं। पर क्या वे ऊपर चढ़ पाते हैं। खुद ऊपर चढ़ें और अपने साथ दूसरों को भी ऊपर चढ़ा लें । यही महत्व की बात है। यह काम तो हमेशा आदर्शवादी लोगों ने ही किया है। समाज में शाश्वत मूल्य आदर्शवादियों के पास होते हैं। व्यवहारवादी तो समाज को नीचे ही गिराते हैं।

झेन की देन Class 10 Sparsh Hindi Explanation Summary

इस प्रसंग में जापान की दिनचर्या एवं रहन-सहन का वर्णन करते हुए लेखक के मित्र उन्हें बताते हैं कि जापान में अस्सी फीसदी लोग मनोरोगी हैं। यहाँ जीवन की रफ़्तार बढ़ गई है। यहाँ व्यक्ति चलते नहीं हैं बल्कि दौड़ते हैं। यहाँ लोग बकते हैं तथा एकांत में बड़बड़ाते रहते हैं। यहाँ के लोग अमेरिका से टक्कर लेने की होड़ में एक महीने में पूरा होने वाला काम एक दिन में ही पूरा करने की कोशिश करते हैं। इससे तनाव बढ़ता है। यही कारण है कि यहाँ मानसिक रोगी बढ़ रहे हैं।

लेखक का मित्र शाम को उसे ‘ टी-सेरेमनी में ले गया । जापान में चाय पीने की इस विधि को चा-नो- यू कहते हैं । एक छह मंजिली इमारत की छत पर एक सुंदर पर्णकुटी बनाई गई थी। बाहर एक बेढब – सा मिट्टी का बरतन था। उसमें पानी भरा हुआ था। उस पानी में उन लोगों ने हाथ-पाँव धोए। तौलिये से पोंछकर अंदर गए। अंदर बैठे ‘चाजीन’ ने उन्हें झुककर प्रणाम किया और बैठने की जगह दिखाई।

फिर उसने अँगीठी सुलगा कर उस पर चायदानी रखी। वह बगल के कमरे से कुछ बरतन ले आया। उसने तौलिये से बरतन साफ़ किए। उसने ये सब कार्य अत्यंत संजीदगी से किए। उस शांत वातावरण में चायदानी के पानी का उबाल भी सुनाई दे रहा था। चाय तैयार होने पर उसने उसे प्यालों में भरा। फिर उसने वे प्याले हम तीन मित्रों के सामने रख दिए। वहाँ की विशेषता यह है कि वहाँ तीन आदमियों से ज़्यादा को प्रवेश नहीं दिया जाता।

कपों में दो-दो घूँट चाय थी। वहाँ महत्त्व शांति का था। वे तीनों एक-एक बूँद चाय पीते हुए डेढ़ घंटे तक चुसकियाँ लेते रहे। लेखक को लगा मानो वह अनंत काल में जी रहा हो। उसे सन्नाटा तक सुनाई देने लगा। अकसर हम या तो गुज़रे हुए दिनों की खट्टी-मीठी यादों में उलझे रहते हैं या भविष्य के रंगीन सपने देखते रहते हैं। हम या तो भूतकाल में रहते हैं या भविष्यकाल में। असल में दोनों काल मिथ्या हैं। हमारे सामने जो वर्तमान क्षण है, वही सत्य है। हमें उसी में जीना चाहिए। चाय पीते-पीते लेखक, के मन से भूत और भविष्य, दोनों काल उड़ गए थे। उसके सामने केवल वर्तमान क्षण था और वह अनंतकाल जितना विस्तृत था। उस दिन लेखक को जीने का वास्तविक अर्थ मालूम हुआ । जापानियों को झेन परंपरा की यह एक बड़ी देन है।

शब्दार्थ

गिन्नी का सोना – सोने में ताँबा मिला हुआ, शुद्ध सोना – बिना मिलावट का सोना, व्यावहारिकता – समय और अवसर देखकर काम करने की सूझ, प्रैक्टिकल आइडियालिस्ट – आदर्श को व्यवहार में उपयोग करने वाले आदर्शवादी, विलक्षण – अद्भुत, शाश्वत – हमेशा बने रहने वाला, मनोरुग्ण-तनाव के कारण मन से बीमार, प्रतिस्पर्धा – होड़, टी-सेरेमनी – जापान में चाय पीने का विशेष आयोजन, दफ़्ती-कागज़ और रद्दी से बनाया गया, पर्णकुटी – पत्तों से बनी कुटिया, बेडब – बेडौल,चाजीन-टी-सेरेमनी में चाय परोसनेवाला, भंगिमा – मुद्रा, जयजयवंती – एक राग का नाम, खदबदाना – उबलते पानी की आवाज़, अनंतकाल – वह काल जो कभी समाप्त हो ना, मिथ्या – झूठ|

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