NCERT Solutions for Class 10 Kritika Hindi एही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा!

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NCERT Solutions for Class 10 Kritika Hindi एही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा! provide comprehensive explanations and step-by-step guidance for solving the questions given in NCERT textbooks. These solutions serve as a valuable resource for self-study, allowing students to practice and revise the topics at their own pace, further strengthening their grasp on the subject.

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एही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा! Class 10 Kritika Hindi NCERT Solutions

1. हमारी आज़ादी की लड़ाई में समाज के अपेक्षित माने जाने वाले वर्ग का योगदान भी काम नहीं रहा है | इस कहानी में ऐसे लोगों के योगदान को किस प्रकार उभारा है?

Solution

भारत की आज़ादी की लड़ाई में सभी धर्म और वर्गों के लोगों ने भाग लिया। टुन्नू और दुलारी जैसे पात्रों के माध्यम से लेखक ने समाज में हीन या उपेक्षित वर्ग को उभारने का प्रयास किया है। दुलारी और टुन्नू दोनों कजली गायक हैं। दुलारी टुन्नू को देखकर रेशम छोड़कर खुद भी खद्दर धारण कर लेती है और विदेशी साड़ियों के बंडल को विदेशी वस्तुओं की होली जलाने के लिए देती है। टुन्नू स्वतंत्रता के लिए निकाले गए जुलूसों में भाग लेते हुए अपनी जान दे देता है।

2. कठोर हृदयी समझी जाने वाली दुलारी टुन्नू की मृत्यु पर क्यों विचलित हो उठी?

Solution

दुलारी अपने कठोर स्वभाव के लिए जानी जाती थी लेकिन उसका स्वभाव नारियल की तरह था। वह टुन्नू को बचकाना समझती थी लेकिन बाद में उसे एहसास होता है कि टुन्नू का प्रेम सच्चा था। टुन्नू ने उससे इज्जत से बात की लेकिन दुलारी ने उसकी बेज्जती की। इसलिए उसने टुन्नू से मिली खादी की धोती पहन ली और विदेशी धोतियों को होली में जलाने के लिए दे दिया।

3. कजली दंगल जैसी गतिविधियों का आयोजन क्यों हुआ करता होगा? कुछ और परंपरागत लोक आयोजनों का उल्लेख कीजिये।

Solution

कजली दंगल जैसे खेल पहले मनोरंजन का साधन हुआ करते थे | कजली गायकों को बुलवाकर उत्सव का आयोजन किया जाता था। उसके साथ उच्च मान सम्मान मिलता था, और यही ऐसे समारोहों का मूल था। सब कुछ उनकी जीत पर निर्भर था।इन कार्यक्रमों में लोक गायकी का प्रदर्शन किया जाता था और देश भक्ति का प्रचार किया जाता था। दक्षिण भारत में बैलों का दंगल, उत्तर भारत में कुश्ती, राजस्थान में पशु मेले आदि ऐसे परंपरागत कार्यक्रम के उदाहरण हैं।

4. दुलारी विशिष्ट कहे जाने वाले सामाजिक-सांस्कृतिक दायरे से बाहर है और फिर भी अति विशिष्ट है | इस कथन को ध्यान में रखते हुए दुलारी की चारित्रिक विशेषताएँ लिखिए।

Solution

दुलारी की आवाज़ में मधुरता और लय का सुंदर संयोजन है, जो उसे एक अद्भुत गायिका बनाता है। वह सवाल-जवाब करने में माहिर थी। दुलारी स्वतंत्रता संघर्ष में शायद शामिल नहीं हुई, लेकिन वह एक देशभक्त महिला थी। उसने आदोलनकारियों को जलाने के लिए बिना हिचके फेंकू द्वारा दी रेशमी साड़ियों का बंडल दे दिया। दुलारी अपने स्वास्थ्य का बहुत ध्यान रखती थी इसलिए वह नियमित रूप से व्यायाम करती थी। दुलारी उच्च वर्ग की नहीं थी, लेकिन स्वाभिमानी थी। उसने सिर उठाकर जीना सीखा। दुलारी कठोर थी लेकिन उसे टुन्नू से प्यार था, इसलिए वह उसकी मृत्यु सुनकर बहुत विचलित हुई।

5. दुलारी का टुन्नू से पहली बार परिचय कहाँ और किस रूप में हुआ?

Solution

टुन्नू और दुलारी भादों में तीज़ के अवसर पर खोजवाँ बाज़ार में मिले। जहाँ उसे गाने के लिए बुलाया गया था। दंगल में दो समूह थे: खोजवां बाजार और बजरडीहा. दुलारी खोजवां बाजार की प्रतिद्वंद्वी थी और टुन्नू बजरडीहा की तरफ से था। टुन्नू ने दुलारी को चुनौती दी जिसे दुलारी ने मुस्कुराते हुए स्वीकार किया क्योंकि दोनों ही प्रश्नोत्तर करने में माहिर थे।

6. दुलारी का टुन्नू को यह कहना कहाँ तक उचित था – “तै सरबउला बोल ज़िंदगी में कब देखले लोट?…!” दुलारी के इस आपेक्ष में आज के युवा वर्ग के लिए क्या सन्देश छिपा है? उदहारण सहित स्पष्ट कीजिये।

Solution

लारी का टुन्नू को यह कहना उचित था “तै सरबउला बोल ज़िंदगी में कब देखले लोट?…” क्योंकि टुन्नू सिर्फ सोलह या सत्रह वर्ष का था और उसे पता नहीं था कि खुद से पैसे कैसे कमाएं।उसे पता नहीं है कि कैसे लोग कौड़ी जोड़ते हैं। यहाँ दुलारी ने उन लोगों पर आक्षेप किया है जो अपनी वास्तविक जीवन में कुछ नहीं करते और सिर्फ दूसरों की नकल पर निर्भर हैं।

7. भारत के स्वाधीनता आंदोलन में दुलारी और टुन्नू ने अपना योगदान किस प्रकार दिया?

Solution

फेंकू द्वारा दिए गए रेशमी साड़ी के बंडल से दुलारी ने विदेशी वस्त्रों के बाहिष्कार के अभियान में अपना योगदान दिया। उसने आन्दोलन में प्रत्यक्ष रूप से भाग नहीं लिया लेकिन उसने अप्रत्यक्ष रूप से योगदान दिया था। टुन्नू ने स्वतन्त्रता संग्राम में सैनिक की तरह काम किया था। रेशमी कुर्ता और टोपी की जगह खादी के कपड़े पहनने लगी। वह अंग्रेज विरोधी आन्दोलन में सक्रिय रूप से भाग लेने लगा और इसी कारण उसे अपनी जान देनी पड़ी।

8. दुलारी और टुन्नू के प्रेम के पीछे उनका कलाकार मन और उनकी कला थी? यह प्रेम दुलारी को देश प्रेम तक कैसे पहुँचता है?

Solution

टुन्नू और दुलारी ने अपनी कला के माध्यम से अपने प्रेम को जीवन में उतारा। दुलारी ने टुन्नू के प्रेम निवेदन को कभी स्वीकारा नहीं लेकिन मन ही मन उससे प्यार करती थी। दुलारी उसके प्रेम को मानना नहीं चाहती थी। दुलारी को लगता था कि उसका प्रेम बस समय के साथ खत्म हो जाएगा, इसलिए वह उसे हमेशा निरादर करती रहती थी।दोनों के बीच उनका कलाकार मन था। लेकिन दुलारी जानती थी कि टुन्नू आत्मा से प्रेम करता था, शारीरिक नहीं। जब टुन्नू को अंग्रेजों द्वारा क्रूर रूप से मार डाला जाता है, तो दुलारी के मन में देश प्रेम की भावना जागती है, इसलिए वह टुन्नू की दी हुई साड़ी पहनकर उसके मृत्यु स्थान पर जाती है। यही घटना दुलारी को देश प्रेम तक पहुँचती है।

9. जलाये जाने वाले विदेशी वस्त्रों में अधिकांश वस्त्र फटे पुराने थे परन्तु दुलारी द्वारा विदेशी मिलों में बानी कोरी साड़ियों का फेंका जाना उसकी किस मानसिकता को दर्शाता है?

Solution

आज़ादी के दीवानों की एक टोली जलाने के लिए विदेशी कपड़े जुटा रहे थे। अधिकांश लोग फटे-पुराने कपड़े दे रहे थे। दुलारी के कपड़े पूरी तरह से नए थे। दुलारी ने फेंकी हुई कोरी साड़ियां दिखाती हैं कि वह अपने देश से प्यार करती थी और उसके लिए देश की अजादी सब कुछ था। साड़ियों का फेंकना उसके टुन्नू के प्रति प्रेम को भी दर्शाता है क्योंकि टुन्नू ने उसको खादी की साडी भेंट की थी।

10. “मन पर किसी का बस नहीं; वह रूप या उम्र का कायल नहीं होता।” टुन्नू के इस कथन में उसका दुलारी के प्रति किशोर जनित प्रेम व्यक्त हुआ है परन्तु उसके विवेक ने उसके प्रेम को किस दिशा की ओर मोड़ा ?

Solution

टुन्नू दुलारी से बहुत प्यार करता था। वह दुलारी से बहुत छोटा था। वह मात्र सत्रह – सोलह साल का लड़का था। दुलारी को लगता था कि उसका प्रेम उसकी उम्र की नादानी के सिवा कुछ नहीं था। इसलिए वह उसे हमेशा निरादर करती रहती थी। टुन्नू दुलारी की आत्मा से प्रेम करता था, न कि उसके शरीर से, इसलिए वह उसे होली पर साड़ी देता है और बदले में कुछ भी नहीं मांगता। टुन्नू अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह में भाग लेता है, विदेशी कपड़े जलाने वाली टोली में भाग लेता है और अंततः देश के लिए अपनी जान देता है।

11. ‘एही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा ! का प्रतीकार्थ समझाइए।

Solution

इस कथन का अर्थ है कि मेरी नाक की लौंग इसी जगह खो गई है, मैं किससे पूछूँ? नाक में लौंग पहना जाना सुहाग का प्रतीक है। दुलारी एक गौनहारिन है, जिसकी मन की नाक में टुन्नू नामक एक लौंग है। दुलारी गाते हुए अपने मन में कहती है कि जिस स्थान पर उसे गाने के लिए आमंत्रित किया गया था उसी स्थान पर टुन्नू की मृत्यु हुई थी यानी इसी स्थान पर मेरा प्रियतम मुझसे बिछड़ गया है। अब मैं किससे पूछूँ कि मेरा प्रिय कहाँ मिलेगा? अर्थात्, अब उसका प्यार उससे दूर है और उसे पाना उसके लिए संभव नहीं है।

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