Chapter 17 कारतूस Class 10 Hindi Sparsh NCERT Summary

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Chapter 17 कारतूस Class 10 Hindi Sparsh NCERT Notes

इस पाठ में वज़ीर अली के बारे में बताया है जिसका एकमात्र लक्ष्य था अंग्रेज़ों को इस देश से बाहर करना। एक बार वह कंपनी की बटालियन के खेमे में ही नहीं आ पहुँचा बल्कि उनके कर्नल पर ऐसे रोब दिखाया कि उसके मुँह से भी वे शब्द निकले जो किसी शत्रु या अपराधी के लिए तो नहीं ही बोले जा सकते थे| इसी प्रसंग को इस एकांकी में दिखाया है|

लेखक परिचय

हबीब तनवीर का जन्म 1923 में छत्तीसगढ़ के रायपुर में हुआ था। इन्होनें 1944 में स्नातक की उपाधि प्राप्त की। उसके बाद ब्रिटेन की नाटक अकादमी से नाट्य-लेखन अध्यन करने गए और फिर दिल्ली लौटकर पेशेवर नाट्य पांच की स्थापना की।

कारतूस Class 10 Sparsh Hindi Explanation Summary

अंग्रेज़ी सरकार वज़ीर अली को गिरफ़्तार करना चाहती है। इस काम के लिए कर्नल कालिंज अपने लेफ़्टीनेंट के साथ जंगल में डेरा डाले हुए हैं। उन्हें वहाँ अपनी फौजों के साथ बैठे हुए कई हफ़्ते गुज़र गए हैं, परंतु अभी तक वे वज़ीर अली को गिरफ़्तार नहीं कर पाए हैं।

कर्नल बताता है कि वज़ीर अली के कारनामें रॉबिनहुड की याद दिलाते हैं। उसे अंग्रेज़ों से सख्त नफ़रत है। उसने पाँच महीने तक यहाँ राज किया, इस दौरान उसने अंग्रेज़ी प्रभाव को जमने नहीं दिया। लेफ़्टीनेंट सआदत अली के बारे में पूछता है तो कर्नल बताता है कि यह आसिफ़उद्दौला का भाई है। सआदत हमारा मित्र है और बहुत ही आराम पसंद आदमी है। उसने हमें अपनी आधी जायदाद दे दी और दस लाख रुपये भी। अब वह भी मौज में है और हम भी। अफगानिस्तान को हमले की दावत सबसे पहले टीपू सुल्तान ने दी थी फिर वजीर अली ने। बाद में बंगाल के नवाब शमसुद्दौला ने भी उसे निमंत्रण भेजा। लेफ़्टीनेंट ने बताया कि कंपनी के खिलाफ़ पूरे हिंदुस्तान में एक लहर – सी दौड़ गई है। कर्नल ने हाँ भरते हुए कहा कि इस लहर को रोकना बहुत ज़रूरी है।

कर्नल ने बताया कि वह सालों से पूरी फौज़ लेकर वज़ीर अली का पीछा कर रहा है परंतु वज़ीर अली उसके हाथ नहीं आता। वह जाँबाज़ है। उसने कंपनी के वकील की हत्या कर डाली थी। कंपनी ने वज़ीर अली को पद से हटाकर बनारस पहुँचा दिया और उसके लिए तीन लाख रुपया सालाना वज़ीफा तय कर दिया। कुछ महीने बाद गवर्नर जनरल ने उसे कोलकाता बुलवाया। इस पर वज़ीर अली ने बनारस में रहने वाले वकील से शिकायत की। वकील ने वज़ीर अली की एक न सुनी, उल्टे उसे खरी-खोटी सुना दी। वज़ीर अली ने खंजर से उसकी हत्या कर दी और अपने साथियों सहित आज़मगढ़ की तरफ भाग गया। आज़मगढ़ के हुक्मरां ने उन्हें घाघरा पहुँचा दिया। अब उसका काफिला जंगलों में भटक रहा है।

कर्नल लेफ्टीनेंट के पूछने पर वज़ीर अली की स्कीम बताता है। वह किसी भी तरह नेपाल पहुँचना चाहता है। वह अफ़गानी हमले का इंतज़ार करना और अपनी ताकत बढ़ाना चाहता है। वह सआदत अली को हटाकर खुद अवध पर कब्ज़ा करना चाहता है। वह अंग्रेज़ों को हिंदुस्तान से निकाल देना चाहता है । अंग्रेज़ी फौज़ और सआदत अली के सिपाही बड़ी सख्ती से उसका पीछा कर रहे हैं। वह इन्हीं जंगलों में है।

तभी एक सिपाही आकर कर्नल को बताता है दूर से धूल उड़ती दिखाई दे रही है, जैसे पूरा काफिला चला आ रहा हो। कर्नल और लेफ्टीनेंट दूर से देखते हैं कि केवल एक घुड़सवार है, जो उनकी ओर बढ़ा चला आ रहा है। वह उस पर नज़र रखते हैं, पर वह उनकी तरफ ही आकर रुक जाता है। वह इज़ाज़त लेकर अंदर आ जाता है और एकांत की माँग करता है।

एकांत होने पर वह कर्नल को कहता है कि वज़ीर अली को गिरफ़्तार करना बहुत कठिन है। वह कर्नल से वज़ीर अली को पकड़ने के लिए कुछ कारतूस माँगता है। वह जब कारतूस लेकर जाने लगता है, तब कर्नल उससे उसका नाम पूछता है। वह बताता है “वज़ीर अली” और घोड़े पर बैठकर चला जाता है। कर्नल देखता रह जाता है। लेफ़्टीनेंट के पूछने पर कर्नल उसका परिचय ‘जाँबाज़ सिपाही’ के रूप में बताता है|

शब्दार्थ

खेमा – डेरा, अफ़साने – कहानियाँ, कारनामे – ऐसे काम जो याद रहें, तख़्त – सिंहासन, मसलेहत – रहस्य, ऐश पसंद – भोग विलास पसंद करने वाला, जाँबाज़ – जान की बाज़ी लगाने वाला, जाती तौर पर – व्यक्तिगत रूप से. वज़ीफा – परवरिश के लिए दी जाने वाली राशि, मुकर्रर – तय करना, तलब किया – याद किया, हुक्मरां – शासक, गर्द – धूल, काफ़िला – एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में जाने वाले यात्रियों का समूह, शुब्हे – संदेह, दिवार हमगोश दारद – दीवारों के भी कान होते हैं, लावलश्कर – सेना का बड़ा समूह और युद्ध सामग्री।

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