Chapter 8 कर चले हम फ़िदा Class 10 Hindi Sparsh NCERT Summary

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Chapter 8 कर चले हम फ़िदा Class 10 Hindi Sparsh NCERT Notes

यह कविता भारत-चीन के बीच हुए युद्ध की पृष्ठभूमि पर आधारित फ़िल्म ‘हकीकत’ के लिए लिखी गई है, जिसमें कवि ने युद्ध में लड़ रहे सैनिकों की मनोदशा का चित्रण किया है। इस कविता में सैनिकों द्वारा अपने साथी सैनिकों अथवा देशवासियों से देश की रक्षा में कुर्बान होने का आग्रह किया गया है| सैनिक मरने से पहले कहता है कि यह कुर्बानी देने का क्रम निरंतर चलता रहेगा। यदि भारत माता की तरफ कोई हाथ उठने लगे तो उस हाथ को तोड़ दो। भारत माता, सीता माता के समान पवित्र है। तुम स्वयं को इतना सामर्थ्यवान बना लो कि कोई भी शत्रु इस पवित्र दामन को न छू सके।

कवि परिचय

कैफ़ी आज़मी का जन्म 19 जनवरी 1919 को आज़मगढ़ जिले में मजमां गाँव में हुआ। ये आगे चलकर कैफ़ी आज़मी के रूप में मशहूर हुए। कैफ़ी आज़मी की गणना प्रगतिशील उर्दू कवियों की पहली पंक्ति में की जाती है। इनकी कविताओं में एक ओर सामाजिक और राजनितिक जागरूकता का समावेश है तो दूसरी ओर हृदय कोमलता भी है। इन्होने 10 मई 2002 को इस दुनिया को अलविदा कहा।

कर चले हम फ़िदा Class 10 Hindi Sparsh Summary

कर चले हम फ़िदा जानो-तन साथियो
अब तुम्हारे हवाले वतन साथियो
साँस थमती गई, नब्ज़ जमती गई
फिर भी बढ़ते क़दम को न रुकने दिया
कट गए सर हमारे तो कुछ ग़म नहीं
सर हिमालय का हमने न झुकने दिया
मरते-मरते रहा बाँकपन साथियो
अब तुम्हारे हवाले वतन साथियो

शब्दार्थ: फ़िदा – बलिदान, हवाले – भरोसे, नब्ज-नस, गम – दुख, बाँकपन – जवानी का जोश, जाने-तन – शरीर और प्राण, जमती गई – ठंड के कारण रुकती गई।

युद्ध भूमि में सैनिक देश पर प्राण न्योछावर करते समय अपने साथियों से कहते हैं कि हे साथियो! अब हम अपनी प्राण और शरीर देश की सुरक्षा के लिए न्योछावर करके इस संसार से जा रहे हैं अब यह देश तुम्हारे हवाले है, तुम्हीं को इसकी रक्षा करनी है। हमारी साँसें थमती जा रही हैं और नब्ज भी कमज़ोर होती जा रही है। इतना होने के बावजूद भी हमने अपने आगे बढ़ते हुए कदमों को रुकने नहीं दिया मातृभूमि की रक्षा करते हुए हमारे शीश भी कट गए, परंतु हमें इसका कोई दुख नहीं है। हमें तो खुशी है कि हमने अपनी जान न्योछावर करके हिमालय (अपने देश) की रक्षा की। अपने देश के सिर को नहीं झकने दिया। मरते समय भी हमारे मन में बलिदान और संघर्ष का जोश बना रहा। अब हम बलिदान देकर दुनिया से जा रहे हैं। अतः अब देश की बागडोर तुम्हारे हाथ में है, इसकी रक्षा करना।

कला पक्ष

  • उर्दू शब्दावली का भरपूर प्रयोग किया गया है।
  • भाषा भावाभिव्यक्ति में सक्षम है।
  • ‘मरते-मरते’ में पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार है।

जिंदा रहने के मौसम बहुत हैं मगर
जान देने की रुत रोज़ आती नहीं
हुस्न और इश्क दोनों को रुस्वा करे
वो जवानी जो खूँ में नहाती नहीं
आज धरती बनी है दुल्हन साथियो
अब तुम्हारे हवाले वतन साथियो

शब्दार्थ: रुत – मौसम, ऋतु, हुस्न – सौंदर्य, इश्क – प्यार, रुस्वा – बदनाम, खूँ – खून ।

देश की रक्षा करते हुए सैनिक गर्वित होते हुए कहते हैं कि जिंदा रहने के तो बहुत अवसर प्राप्त होते हैं यानी जीवन में आनंद लेने के समय तो बार-बार आते हैं, परंतु देश के लिए जान देने की मौके रोज़ नहीं आते। जब भी देश पर आक्रमण हो, तो नवयुवकों को प्रेम और सुंदरता त्यागकर देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान कर देना चाहिए। इसी में भी उसके यौवन की सार्थकता है। सैनिक नवयुवकों का आह्वान करते हुए कहते हैं कि आज धरती दुल्हन के समान सजी हुई है। हमें इसकी माँग अपने खून से भरनी है। यह वतन की रक्षा करने का भार अब तुम्हारे कंधों पर है।

कला पक्ष

  • उर्दू शब्दावली का भरपूर प्रयोग किया गया है।
  • भाषा प्रभावोत्पादक है।

राह कुर्बानियों की न वीरान हो
तुम सजाते ही रहना नए काफ़िले
फ़तह का जश्न इस जश्न के बाद है
जिंदगी मौत से मिल रही है
गले बाँध लो अपने सर से कफ़न साथियो
अब तुम्हारे हवाले वतन साथियो

शब्दार्थ: कुर्बानियों – बलिदानों, राह – मार्ग, रास्ता, वीरान – सुनसान, काफ़िले – यात्रियों का समूह, फ़तह – जीत, जश्न – खुशी।

सैनिक देशवासियों को संबोधित करते हुए कहते हैं कि वे देश पर अपने प्राणों का बलिदान करके जा रहे हैं, लेकिन उनके बाद भी यह सिलसिला चलता रहना चाहिए। बलिदानियों का रास्ता कभी सुनसान नहीं होने देना। इस बलिदान के बाद तुम्हें जीवन की खुशी मनाने के अवसर मिलेंगे। इस समय जिंदगी मृत्यु से गले मिल रही है अर्थात यह जीवन क्षणभंगुर होने के कारण मृत्यु के समीप है। अब तुम अपने सिर पर कफ़न बाँधकर मृत्यु को गले लगाने के लिए तैयार हो जाओ यानी देश की रक्षा के लिए दुश्मनों से लड़ने के लिए तैयार हो जाओ| सैनिक कहते हैं कि हमारे जाने के बाद देश की रक्षा की जिम्मेदारी आने वाली पीढ़ी पर है|

कला पक्ष

  • उर्दू शब्दावली का भरपूर प्रयोग किया गया है।
  • भाषा प्रभावोत्पादक है।

खींच दो अपने खू से ज़मी पर लकीर
इस तरफ़ आने पाए न रावन कोई
तोड़ दो हाथ अगर हाथ उठने लगे
छु न पाए सीता का दामन कोई
राम भी तुम, तुम्हीं लक्ष्मण साथियो
अब तुम्हारे हवाले वतन साथियो।

शब्दार्थ: ज़मी – धरती, पृथ्वी, भूमि, दामन – आँचल, वतन – देश।।

सैनिक अपना बलिदान देने से पहले अपने साथियों से कहता है कि अपने रक्त से ज़मीन पर लकीर खींच दो ताकि हमारी तरफ कोई भी रावण रूपी शत्रु आ ना पाए| यदि कोई दुश्मन भारत माता के आँचल को छूने का दुस्साहस करे तो उसका हाथ तोड़ दो यानी उसे पीछे धकेल दो| इस प्रकार का कार्य करो कि कोई सीता के पवित्र आँचल को छू न सके यानी भारत माता पर कोई आँच न आ पाए। अब तुम्हीं राम हो और तुम्हीं लक्ष्मण हो यानी दुश्मनों को अब तुम्हें ही हराना है इसलिए अब तुम देश की रक्षा करो। इसकी रक्षा की जिम्मेदारी तुम्हारी है|

कला पक्ष

  • उर्दू शब्दों का प्रयोग किया गया है तथा भाषा प्रभावोत्पादक है।
  • दृष्टांत अलंकार का प्रयोग किया गया है।
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