Chapter 11 डायरी का एक पन्ना Class 10 Hindi Sparsh NCERT Summary

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Chapter 11 डायरी का एक पन्ना Class 10 Hindi Sparsh NCERT Notes

‘डायरी का एक पन्ना’ पाठ में सीताराम सेकसरिया ने 26 जनवरी 1931 को कलकत्ता में मनाए गए स्वतंत्रता दिवस का विवरण प्रस्तुत किया है।

लेखक परिचय

सीताराम सेकसरिया का जन्म 1892 में राजस्थान के नवलगढ़ में हुआ परन्तु अधिकांश जीवन कलकत्ता में बिता। ये व्यापार से जुड़े होने के साथ अनेक साहित्यिक, सांस्कृतिक और नारी शिक्षण संस्थाओं के प्रेरक, संस्थापक और संचालक रहे। महात्मा गांधी के आह्वाहन पर ये स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े। कुछ साल तक ये आजाद हिंद फ़ौज के मंत्री भी रहे। इन्होने स्वाध्याय से पढ़ना-लिखना सीखा।

डायरी का एक पन्ना Class 10 Sparsh Hindi Summary

26 जनवरी 1930 को भारत में पहला स्वतंत्रता दिवस मनाया गया था और 26 जनवरी 1931 को इसकी पुनरावृत्ति की गई थी| कलकत्ता में इस समारोह के लिए पहले से तैयारियाँ की गई थीं। इसके प्रचार में काफ़ी खर्च आया था। बड़े बाज़ार के प्रायः सभी मकानों पर राष्ट्रीय झंडा फहरा रहा था। कई मकान तो ऐसे सजाए गए थे मानो आजादी मिल गई हो। झंडे और साज-सज्जा को देखकर सब लोग उत्साहित थे। पुलिस गश्त लगा रही थी। ट्रैफिक पुलिस को भी इसी काम में लगाया गया था। घुड़सवार पुलिस भी थी। पुलिस का घेराव बड़े-बड़े पार्कों व सार्वजनिक स्थलों को पुलिस ने सुबह ही घेर लिया था।

मोनूमेंट के नीचे जहाँ सभा होने वाली थी, उस जगह को पुलिस ने सुबह से घेर लिया था। कई जगह प्रातः ही झंडा फहराया गया। श्रद्धानंद पार्क में बंगाल प्रांतीय विद्यार्थी संघ के मंत्री अविनाश बाबू ने झंडा गाड़ा तो उन्हें पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। तारा सुंदरी पार्क में बड़ा-बाज़ार कांग्रेस कमेटी के युद्ध मंत्री हरिश्चंद्र सिंह झंडा फहराने गए, पर वे भीतर न जा सके। वहाँ काफी मारपीट हुई और दो-चार आदमियों के सिर फट गए। गुजराती सेविका संघ की लड़कियों ने जुलूस निकाला तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। 11 बजे मारवाड़ी बालिका विद्यालय की लड़कियों ने अपने विद्यालय में झंडोत्सव मनाया। इसमें जानकी देवी, मदालसा आदि भी गई थीं।

सुभाष बाबू के पूरे जुलूस का भार पूर्णोदास पर था। 2-3 बजे के करीब पूर्णोदास व उनके साथियों को पकड़ लिया गया। स्त्रियों की टोलियाँ भी निर्धारित समय पर पहुँचने की कोशिश कर रही थीं। तीन बजे तक हजारों की भीड़ इकट्ठी हो चुकी थी। लोग भी टोलियाँ बनाकर मैदानों में घम रहे थे। पलिस कमिश्नर ने नोटिस निकाला कि अमक धारा के तहत सभ लेनेवाले को दोषी समझा जाएगा। उधर कौंसिल ने खुली चुनौती दी कि चार बजकर चौबीस मिनट पर झंडा फहराया जाएगा और स्वतंत्रता की प्रतिज्ञा पढ़ी जाएगी।

4 बजकर 10 मिनट पर जुलूस लेकर आए। भीड़ की अधिकता के कारण पुलिस जुलूस रोक न सकी। पुलिस ने लाठी चार्ज शुरू किया। बहुत आदमी घायल हो गए। क्षितीश चटर्जी का सिर फट गया था। स्त्रियाँ भी बड़ी संख्या में वहाँ पहुँच गईं। सुभाष बाबू पर भी लाठियाँ बरसाईं। वे बड़े जोर से वंदेमातरम बोल रहे थे। वे आगे बढ़ने के लिए कह रहे थे। उन्हें पकड़ लिया गया और गाड़ी में बिठाकर लाल बाज़ार लॉकअप में बंद कर दिया गया।

स्त्रियाँ जुलूस बनाकर चलीं। पुलिस के डंडों से अनेक लोग घायल हो गए। विमल प्रतिभा स्त्रियों के जुलूस का नेतृत्व कर रही थीं। वे सभी स्त्रियाँ बहू बाज़ार के मोड़ पर बैठ गईं। बाद में पुलिस उन्हें लारी में बिठाकर लाल बाज़ार ले गई। वृजलाल गोयनका को भी गिरफ्तार कर लिया गया। दो सौ आदमियों के जुलूस को भी लाल बाज़ार में गिरफ़्तार कर लिया गया था। मदालसा भी पकड़ी गई। कुल 105 स्त्रियाँ पकड़ी गई थीं। रात में नौ बजे सबको छोड़ दिया गया।

रात आठ बजे खादी भंडार से कांग्रेस ऑफिस में फोन आया कि अनेक लोग घायलावस्था में यहाँ पड़े हैं। उनके लिए गाड़ी चाहिए। डॉ. दासगुप्ता उनकी देखभाल कर रहे थे। वहाँ जाने पर मालूम हुआ कि कुल 160 आदमी अस्पतालों में पहुँचे। लगभग दो सौ लोग घायल हुए थे। लॉकअप में स्त्रियों की संख्या 105 थी। उस दिन की घटना अपूर्व है। इस घटना से बंगाल या कलकत्ता के नाम पर लगा हुआ यह कलंक धुल गया कि यहाँ काम नहीं हो रहा है।

शब्दार्थ

पुनरावृत्ति – फिर से आना, गश्त – पुलिस कर्मचारी का पहरे के लिए घूमना, सारजेंट – सेना में एक पद, मोनूमेंट – स्मारक, कौंसिल – परिषद, चौरंगी – कलकत्ता (कोलकाता) शहर में एक स्थान का नाम, वालेंटियर – स्वयंसेवक, संगीन – गंभीर, मदालसा – जानकीदेवी एवं जमना लाल बजाज की पुत्री का नाम।

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