Chapter 15 अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले Class 10 Hindi Sparsh NCERT Summary

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Chapter 15 अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले Class 10 Hindi Sparsh NCERT Notes

लेखक परिचय

निदा फ़ाज़ली का जन्म 12 अक्टूबर 1938 को दिल्ली में हुआ और बचपन ग्वालियर में बिता। ये साठोत्तर पीढ़ी के महत्वपूर्ण कवि माने जाते हैं। आम बोलचाल की भाषा में और सरलता से किसी के भी दिलोदिमाग में घर कर सकें ऐसी कविता करने में इन्हें महारत हासिल है। गद्य रचनाओं में शेर-ओ-शायरी परोसकर बहुत कुछ को थोड़े में कह देने वाले अपने किस्म के अकेले गद्यकार हैं। इन दिनों फिल्म उद्योग से सम्बन्ध हैं।

अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले Class 10 Sparsh Hindi Summary

बाइबिल के सोलोमन को कुरआन में सुलेमान कहा गया है। वे ईसा से 1025 वर्ष पूर्व एक बादशाह थे। वे मनुष्य की ही नहीं पशु-पक्षियों की भी भाषा समझते थे। एक बार वे अपने लश्कर के साथ रास्ते से गुज़र रहे थे। रास्ते में कुछ चीटियाँ उनके घोड़ों की आवाज़ सुनकर अपने बिलों की तरफ वापस चल पड़ीं। सुलेमान ने उनसे कहा, ‘घबराओ नहीं, सुलेमान को खुदा ने सबका रखवाला बनाया है। मैं किसी के लिए मुसीबत नहीं हूँ। सबके लिए मुहब्बत हूँ।’ यह कहकर वे अपनी मंज़िल की तरफ बढ़ने लगे।

ऐसी ही एक घटना का उल्लेख महाकवि शेख अयाज़ ने अपनी आत्मकथा में किया है । एक दिन उनके पिता कुएँ से नहाकर लौटे तो खाना खाते समय उन्होंने देखा कि एक च्योंटा उनकी बाजू पर रेंग रहा है, वे भोजन छोड़कर उस च्योंटे को कुएँ पर छोड़ने गए। नूह का प्रसंग

बाइबिल में भी नूह नाम के एक पैगंबर का जिक्र आता है कि एक बार उन्होंने एक घायल कुत्ते को दुत्कार दिया था। कुत्ते ने कहा था कि न मैं अपनी मर्जी से कुत्ता हूँ और न तुम अपनी पसंद से इंसान हो। इस घटना का उनपर बहुत ही गहरा असर हुआ था। युधिष्ठिर का साथ भी अंत तक कुत्ते ने ही दिया था।

जब से दुनिया अस्तित्व में आई है इसमें प्रकृति के सभी जीवों की बराबर की हिस्सेदारी है, परंतु मनुष्य ने अपनी बुद्धि से दीवारें खड़ी कर दी हैं। पहले लोग मिल-जुलकर रहते थे। अब वे बँट चुके हैं। बढ़ती हुई आबादी में समंदर को पीछे धकेल दिया है, पेड़ों को रास्ते से हटा दिया है। फैलते हुए प्रदूषण ने पंछियों को बस्तियों से भगाना शुरू कर दिया है। प्रकृति का रूप बदल गया है। लेखक की माँ कहती थीं कि सूरज ढले आँगन के पेड़ से पत्ते मत तोड़ो। दीया – बत्ती के वक्त फूल मत तोड़ो। दरिया पर जाओ तो उसे सलाम करो। कबूतरों को मत सताया करो। मुर्गे को परेशान मत किया करो। वह अज़ान देकर सबको जगाता है।

लेखक बताते हैं कि ग्वालियर में उनका मकान था। उनके रोशनदान में में कबूतर के जोड़े ने घोंसला बना लिया था। एक बार बिल्ली ने उसमें से एक अंडा तोड़ दिया। दूसरे अंडे की रक्षा करते समय वह अंडा लेखक की माँ से टूट गया। इस कृत्य के लिए उनकी माँ रोती रहीं। उन्होंने माफ़ी के लिए रोज़ा रखा। बार- बार नमाज़ पढ़कर खुदा से इस गलती के लिए माफ़ करने की दुआ माँगती रहीं।

अब संसार में काफ़ी बदलाव आ गए हैं। लेखक मुंबई के वर्सोवा इलाके में रहते थे। वहाँ समंदर किनारे बस्ती बन गई है। यहाँ से परिंदे दूर चले गए हैं। लोग उन्हें अपने घरों में घोंसला नहीं बनाने देते। उनके आने की खिड़की को बंद कर दिया गया है। अब इनका दुख बाँटने वाला कोई नहीं है।

शब्दार्थ

हाकिम – राजा या मालिक, लश्कर (लशकर) – सेना या विशाल जनसमुदाय, लक़ब – पदसूचक नाम, प्रतीकात्मक – प्रतीकस्वरुप, दालान – बरामदा, सिमटना – सिकुड़ना, जलजले – भूकम्प, सैलाब – बाढ़, सैलानी – ऐसे पर्यटक जो भ्रमण कर नए-नए विषयों के बारे में जानना चाहते हैं, अज़ीज़ – प्रिय, मज़ार – दरगाह, गुंबद – मस्जिद, मंदिर और गुरुद्वारे के ऊपर बनी गोल छत जिसमें आवाज़ गूँजती है, अज़ान – नमाज़ के समय की सूचना जो मस्जिद की छत या दूसरी ऊँचे जगह पर खड़े होकर दी जाती है, डेरा – अस्थायी पड़ाव|

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